मांगलिक होने का अर्थ क्या है ?

मांगलिक होने का अर्थ क्‍या है ?

 

कोई जातक चाहे वह स्‍त्री हो या पुरुष उसके मांगलिक होने का अर्थ है कि उसकी कुण्‍डली में मंगल अपनी प्रभावी स्थिति में है। शादी के लिए मंगल को जिन स्‍थानों पर देखा जाता है वे 1,4,7,8 और 12 भाव हैं। इनमें से केवल आठवां और बारहवां भाव सामान्‍य तौर पर खराब माना जाता है। सामान्‍य तौर का अर्थ है कि विशेष परिस्थितियों में इन स्‍थानों पर बैठा मंगल भी अच्‍छे परिणाम दे सकता है। तो लग्‍न का मंगल व्‍यक्ति की पर्सनेलिटी को बहुत अधिक तीक्ष्‍ण बना देता है, चौथे का मंगल जातक को कड़ी पारिवारिक पृष्‍ठभूमि देता है। सातवें स्‍थान का मंगल जातक को साथी या सहयोगी के प्रति कठोर बनाता है। आठवें और बारहवें स्‍थान का मंगल आयु और शारीरिक क्षमताओं को प्रभावित करता है। इन स्‍थानों पर बैठा मंगल यदि अच्‍छे प्रभाव में है तो जातक के व्‍यवहार में मंगल के अच्‍छे गुण आएंगे और खराब प्रभाव होने पर खराब गुण आएंगे। मांगलिक व्‍यक्ति देखने में ललासी वाले मुख का, कठोर निर्णय लेने वाला, कठोर वचन बोलने वाला, लगातार काम करने वाला, विपरीत लिंग के प्रति कम आकर्षित होने वाला, प्‍लान बनाकर काम करने वाला, कठोर अनुशासन बनाने और उसे फॉलो करने वाला, एक बार जिस काम में जुटे उसे अंत तक करने वाला, नए अनजाने कामों को शीघ्रता से हाथ में लेने वाला और लड़ाई से नहीं घबराने वाला होता है। इन्‍हीं विशेषताओं के कारण गैर मांगलिक व्‍यक्ति अधिक देर तक मांगलिक के सानिध्‍य में नहीं रह पाता।

 

मंगलिक दोष (manglik dosha):

  1. कुण्डली में जब प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में मंगल होता है तब मंगलिक दोष (manglik dosha)लगता है
  2. कुण्डली में चतुर्थ और सप्तम भाव में मंगल मेष अथवा कर्क राशि के साथ योग बनाता है तो मंगली दोष लगता है

मंगल भी निम्न लिखित परिस्तिथियों में दोष कारक नहीं होगा :

  1. चतुर्थ और सप्तम भाव में मंगल मेष, कर्क, वृश्चिक अथवा मकर राशि में हो और उसपर क्रूर ग्रहों की दृष्टि नहीं हो
  2. मंगल राहु की युति होने से मंगल दोष का निवारण हो जाता है
  3. लग्न स्थान में बुध व शुक्र की युति होने से इस दोष का परिहार हो जाता है.
  4. कर्क और सिंह लग्न में लगनस्थ मंगल अगर केन्द्र व त्रिकोण का स्वामी हो तो यह राजयोग बनाता है जिससे मंगल का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है.
  5. वर की कुण्डली में मंगल जिस भाव में बैठकर मंगली दोष बनाता हो कन्या की कुण्डली में उसी भाव में सूर्य, शनि अथवा राहु हो तो मंगल दोष का शमन हो जाता है.
  6. जन्म कुंडली के 1,4,7,8,12,वें भाव में स्थित मंगल यदि स्व ,उच्च मित्र आदि राशि -नवांश का ,वर्गोत्तम ,षड्बली हो तो मांगलिक दोष नहीं होगा
  7. यदि 1,4,7,8,12 भावों में स्थित मंगल पर बलवान शुभ ग्रहों कि पूर्ण दृष्टि हो

 

उपर्युक्त संयोजन के साथ पैदा हुए व्यक्ति को मंगलिक व्यक्ति कहा जाता है। चूंकि मंगल को युद्ध का ग्रह माना जाता है, इसलिए मंगल दोष ने शादी के लिए बेहद प्रतिकूल परिस्थितियां पैदा कीं। ऐसे व्यक्तियों के विवाहित जीवन में तनाव, असुविधा, दुःख और जुदाई बहुत ज्यादा होती है। इस तरह के अधिकांश लोग पारिवारिक जीवन में असंतोष का अनुभव करते हैं।

 

मांगलिक (मंगल) दोष प्रभाव

 

पहले घर में मंगल ग्रह किसी दिए गए विवाह में पति को गंभीरता से प्रभावित करता है। दोनों पार्टनर अक्सर कई परिवारों में अक्सर शारीरिक आक्रमण और हिंसा के लिए संघर्ष करते हैं।

 

दूसरे घर में मंगल, व्यक्ति के परिवार के जीवन में बहुत सारी परेशानियां लाता है एक व्यक्ति की व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन दोनों ही गंभीर गड़बड़ी होती है।

 

4 घंटों में मंगल ग्रह का परिणाम पेशेवर जीवन में प्रतिकूल परिणाम में होता है। अक्सर व्यक्ति को नौकरियों के बीच स्थानांतरित करना होगा अंतिम परिणाम संतोषजनक नहीं होगा।

व्यक्ति को वित्तीय समस्याओं का भी अनुभव होगा।

 

7 वें घर में मंगल ग्रह एक व्यक्ति को अत्यधिक चिड़चिड़ा और दुर्भावनापूर्ण बना देता है। उनकी उच्च ऊर्जा का परिणाम आक्रामक व्यवहार में होगा। परिवार में कई झगड़े हैं

और जीवन भागीदारों के बीच।

 

8 वीं घर में मंगल ग्रह का मतलब है कि व्यक्ति बहुत आलसी होगा। वह वित्त और परिसंपत्तियों को संभालने के संबंध में लापरवाह और लापरवाह होगा और ज्यादातर मामलों में

अंत में माता-पिता की संपत्ति खोना

 

12 वीं घर में मंगल ग्रह का संकेत है कि व्यक्ति हॉल में बहुत सारे दुश्मन हैं। व्यक्ति में कई मानसिक समस्याएं आती हैं व्यक्ति का बहुत सामना हो सकता है

वित्तीय घाटा।

 

 

 

मांगलिक (मंगल) दोष उपचार

 

  1. एपिलेशन चरण (शुक्ल पक्ष) के दौरान हर नए महीने के पहले मंगलवार को उपवास का निरीक्षण करें। उपवास के दौरान, आप केवल तोर दाल खा सकते हैं अन्यथा विभाजित कबूतर दाल के रूप में जाना जाता है। मंगलवार को, मंत्र मंगल मंत्र
  2. हर दिन, इसे गायत्री मंत्र को 108 बार गाने के लिए अभ्यास करना है।
  3. चिंत हनुमान चालीसा एक दिन में कम से कम एक बार।
  4. हरमन हनुमान प्रतिमा या तस्वीर के सामने या हनुमान मंदिर में 108 बार बैठे “ओम श्रीम हनुमान्त नमः”
  5. मंगलवार को हनुमान मंदिर पर जाएं और मिठाई और स्रीमिलन की पेशकश करें। घी की दीपक का दीपक भी बहुत उपयोगी माना जाता है।
  6. कुछ श्रमिकों को तेज लौह सामग्रियों या लोहे के मदों के साथ मिलें और उन्हें लाल कपड़े दान करें।
  7. मंगल का जन्म हुआ लड़का केवल मंगल की लड़की से ही विवाहित होना चाहिए।
  8. परंपरा में, मंगल स्त्री के असर से निपटने के लिए मंगल की महिलाओं द्वारा कुंभ विवाह नामक एक प्रक्रिया है।
  9. मंगलवार को, तेज वस्तुएं जैसे चाकू, लाल ग्राम दाल, गेहूं ब्रेड, लाल रंग के कपड़े और लाल पत्थरों से बना भोजन दान करें।

 

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